Skip to main content

राखी सावंत को क्यों पीटते थे घरबाले

राखी सावंत को क्यों पीटते थे घरबाले
राखी सावंत ने बताया कि उन्हें अपनी खूबसूरती बढ़ाने के लिए सर्जरी क्यों करवानी पड़ी. उन्होंने एक इंटरव्यू में अपनी सर्जरी पर खुलकर बात की.
राखी ने कहा कि फिल्म प्रोड्यूसर्स ने जब काम देने से इंकार कर दिया, तो उन्हें अपने रंग-रूप में सुधार लाने के लिए सर्जरी करवानी पड़ी थी. राखी का असली नाम नीरू भेदा है. उन्होंने वीकेंड चैट शो 'जज्बात संगीन से नमकीन तक' के एक एपिसोड की शूटिंग की है. 
राखी ने एक बयान में कहा कि जब शो के मेजबान राजीव खंडेलवाल ने राखी को नीरू कहकर पुकारा तो वह बहुत भावुक हो गईं. राखी ने कहा, "मेरे परिवार ने मुझे मनोरंजन उद्योग में जाने की इजाजत कभी नहीं दी और अगर वे मुझे नाचते देख लेते तो पीटकर लाल-पीला कर देते. आखिरकार मैं जब मुंबई पहुंची, तो मैंने कई निर्माताओं के सामने नाचना और अपनी प्रतिभा दिखाना शुरू किया, जिन्होंने मुझे बुरी नजर से भी देखा."
उन्होंने कहा, "मैंने सोचा कि ऐसे विचार शून्य लोगों के सामने नाचने के बजाय मैं डांस बार में डांस करूंगी. मैंने कई बार ठुकराए जाने का सामना किया और लुक व रंग-रूप सुधारने के लिए सर्जरी का सहारा लिया. सर्जरी रूम में मैं नीरु भेदा के रूप में गई थी, लेकिन वहां अपने बेहतर रंग-रूप के साथ राखी सावंत के रूप में निकली.

Comments

Popular posts from this blog

सद्‌गुरु - एक पिता और पति के रूप में

            सद्‌गुरु बहुत से लोगों के लिए बहुत सारी भूमिकाओं में हैं – गुरु, रहस्यवादी, योगी, मित्र, ज्ञात (और अज्ञात) सभी विषयों पर सलाहकार, कवि, वास्तुशिल्पी... उनके बहुत से चेहरे, बहुत सारे आयाम हैं। मगर वह एक पिता और एक पति भी हैं। सद्‌गुरु  बहुत से लोगों के लिए, बहुत अलग-अलग तरह से मायने रखते हैं – गुरु, दिव्यदर्शी, योगी, मित्र, बहुत से जाने-अनजाने विषयों के सलाहकार, कवि, आर्किटेक्ट...जाने कितने चेहरे, और कितने ही आयाम! परंतु वे एक पिता और पति भी हैं। आध्यात्मिक जागरण अनुभव के दो वर्ष बाद, उनकी भेंट अपनी पत्नी विजयकुमारी से हुई, जिसे स्नेह से विज्जी कह कर बुलाया जाता है। उनकी पहली भेंट, मैसूर में एक लंच के दौरान हुई, जहाँ वे एक अतिथि के रूप में गए थे। इसके बाद उनके बीच कुछ समय के लिए बहुत ही हार्दिक पत्रों का आदान-प्रदान हुआ। सन् 1984 की   महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर, वे विवाह बंधन में बंध गए। सद्‌गुरु की योग कक्षाओं की दिनचर्या ज़ोरों पर थी और वे कार्यक्रमों के आयोजन के लिए पूरे दक्षिण भारत के दौरों पर रहते। विज्जी एक बैंक मे...

Story of HONDA company in hindi

दोस्तों ये कहानी है जापान के इंजिनियर और होंडा मोटर लिमिटेड (honda motor pvt. ltd. company) के संस्थापक Soichiro Honda की. होंडा का जन्म जापान में 1906 में हुआ. उन्होंने अपना शुरूआती जीवन अपने पिता के साथ बिताया जहाँ वे  अपने पिता  जो पेशे से लौहार थे को बाइसिकल रिपेयर बिजनेस में सहयोग करते थे. उनको बचपन से ही मोटर गाडियों में रूचि थी. उन्होंने ज्यादा पढाई नहीं की और 15 साल की उम्र में ही tokyo काम की तलाश में चले गए. 1928 मे ऑटोरिपेयर का बिजनेस शुरू करने वे वापिस घर लौटे. 1937 में होंडा ने छोटे इंजनो के लिए piston rings बनाई. वे इसे बड़ी कार निर्माता कंपनी TOYOTA को बेचना चाहते थे. शीघ्र ही उन्हें TOYOTA को पिस्टन रिंग्स सप्लाई करने का कॉन्ट्रैक्ट मिल गया लेकिन आवश्यक गुणवत्ता  को प्राप्त न कर पाने के कारण उन्होंने ये कॉन्ट्रैक्ट खो दिया. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और इंजनो की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए वे विभिन्न कंपनीयों के मालिको से मिले ताकि बेहतर पिस्टन रिंग्स बना सके. जल्द ही उन्होंने ऐसा तरीका खोज निकाला जिससे बेहतर गुणवत्ता के पिस्टन रिंग्स तैयार हो ...

यहां औरतों को बुढ़ापा नहीं आता, खूबसूरती इतनी मानो परियां धरती पर आई हो

यहां औरतों को बुढ़ापा नहीं आता, खूबसूरती इतनी मानो परियां धरती पर आई हो जी हां हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी जगह के बारे में यह जगह जन्नत से भी कम नहीं है और यहां की औरतें कभी बूढ़ी नहीं होती 60 साल में भी बन सकती हैं मां, यहाँ के पानी की तासीर ऐसी है कि यहां औरतें 65 साल की उम्र में भी गर्भ धारण करती हैं और बीमार नहीं होती दुनिया की एक जगह ऐसी है जहां के लोग कभी बूढ़े नहीं देखते यहां की लड़कियां और महिलाएं इतनी खूबसूरत होती है कि उन्हें देखकर लगता है । मानो पारियां धरती पर आई हो हर कोई चाहता है कि बुढ़ापा कभी नहीं आए मगर बढ़ती उम्र का असर तो हर किसी को आता ही है| यहां के पानी की तासीर ऐसी है कि यहां औरतें 65 साल की उम्र में गर्भ धारण करती हैं। इस उम्र में मां बनने से कोई तकलीफ नहीं होती है यह जगह हुंजा घाटी जो पाक अधिकृत कश्मीर में आती ह। गिलगित बाल्टिस्तान के पहाड़ों में स्थित हुंजा घाटी में पाई जाती है । हुंजा भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा के पास पड़ता है इस जगह को युवाओं को युवाओ का नखलिस्तान भी कहा जाता है । हुंजा घाटी के लोग बिना किसी बीमारी के औसतन 110 ...